वीर सावरकर के जीवनी की कहानी | Veer Savarkar History In Hindi - Smart Way

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Thursday, July 30, 2020

वीर सावरकर के जीवनी की कहानी | Veer Savarkar History In Hindi



हेलो दोस्तों आज हम आपके लिए वीर सावरकर के जीवन का इतिहास (Veer Savarkar History In Hindi) लेकर आये है। इसमें आप ये जान पाएंगे की कैसे उन्होंने इस देश के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया। यहाँ हम आपको उनके जीवन की पूरी बायोग्राफी (Veer Savarkar Biography In Hindi) के बारे में बताने जा रहे है।


वीर सावरकर का इतिहास | वीर सावरकर की जीवनी  | Veer Savarkar History In Hindi | Biography Of Veer Savarkar In Hindi



आज के आधुनिक भारत में कुछ क्रांतिकारियों का नाम बहुत ज्यादा प्रचलन में है जिनमे से एक है वीर सावरकर। आज एक समय में कुछ लोग वीर सावरकर के समर्थन में है तो कुछ ऐसे लोग है जो आज भी वीर सावरकर को वीर नहीं मानते है।


लेकिन यदि आपने कभी वीर सावरकर के इतिहास को पढ़ा होगा तो आप भी उनके अस्तित्व को नकार नहीं सकते। वीर सावरकर जी ने भी भारत की स्वतंत्रता और धर्म को सुधारने के लिए जो किया है उन सब की चर्चा आज भी राजनैतिक हालातो में होती है।

लेकिन वीर सावरकर के नाम आज भी उनके समर्थको और विरोधियो में काफी भ्रांतिया फैली हुयी है। मतलब वो भी उनके द्वारा किये गए कार्यो को सही तरीके से नहीं जान पाए और ही वो ये जान पाए की उन्होंने कितना संघर्ष किया है।

वीर सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर है। वीर सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर पंथ था और उनकी माता का नाम राधाबाई था। उनके दो भाई (गणेश और नारायण दामोदर सावरकर) और एक बहन (नैना बाई) थी।



जब वीर सावरकर 9 वर्ष की आयु में थे तब हैजे की बीमारी की वजह से उनकी माता जी का देहांत हो गया था। उनकी माता जी के देहांत के 7 साल बाद ही उनके पिता की भी प्लेग महामारी की वजह से मृत्यु हो गयी थी।

माता - पिता की मृत्यु के बाद घर की सारी जिम्मेदारी वीर सावरकर के बड़े भाई के ऊपर आयी। उनके बड़े भाई ने ही परिवार के पालन - पोषण का कार्य संभाला। अपने भाई की कठनाईओ और संघर्ष को देख कर वीर सावरकर के व्यक्तित्व पर इसका गहरा असर पड़ा। वो पढ़ाई में भी बहुत अच्छे थे और साथ ही साथ उनको कहानिया और कविताये लिखने का भी शोक था। उनके बड़े भाई के सामने आर्थिक संकट होने के बावजूद भी वीर सावरकर की उच्च शिक्षा का समर्थन करते थे। 


इन सब के बीच विनायक ने अपने साथ कुछ मित्रो को शामिल कर के उन के अंदर भी राष्ट के लिए क्रांति की ज्वाला भर दी। कुछ समय बाद ही उनका विवाह यमुना बाई नाम की एक कन्या के साथ 1901 में हो गया। विवाह के बाद जब उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए इच्छा जताई तो उनके ससुर जी ने वीर सावरकर की शिक्षा का भार उठाया। फिर वो 1902 में मेट्रिक की पढ़ाई पूरी करने के लिए पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में बीएए किया। और इसके बाद वो लॉ की पढाई करने के लिए लंदन चले गए।



इन सब की पढ़ाई के दौरान ही वीर सावरकर का झुकाव राजनैतिक गतिवधियों के तरफ हुआ। 1904 में वीर सावरकर ने अभिनव भारत का गठन किया और 1905 में उन्होंने बंगाल विभाजन का जम कर विरोध किया। इस ही कारण वीर सावरकर के कई पत्र और पत्रिकाओं में लेख छपे। इन सब क्रांतियों का उन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।

इन सब के बीच वीर सावरकर की मुलाकात लंदन में लाला हरदयाल से हुयी जो उन दिनों लंदन के इंडिया हाउस की देख रेख करते थे।

1907 में इंडिया हाउस में आयोजित 1857 के पहली स्वतंत्रता संग्राम की स्वर्ण जयंती की गतिवधि में भागीदारी निभाई।

जुलाई 1909 को मदन लाल ढींगरा ने विलयम कर्जन को गोली मारी इसके बाद वीर सावरकर ने लंदन टाइम्स में एक लेख लिखा था और 12 मई 1910 में उनको गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन 08 जुलाई 1910 को वीर सावरकर ब्रिटिश गिरफ्त से फरार हो गए।

24 दिसंबर 1910 को वीर सावरकर को आजीवन कारावास की सजा दी गयी। 21 जनवरी 1911 को दोबारा से वीर सावरकर को आजीवन कारावास की सजा दी गयी। सावरकर ही एक ऐसे क्रांतिकारी है जिनको अपने एक जीवन के अंदर 2 बार आजीवन कारावास की सजा मिली थी।


7 अप्रैल 1911 को वीर सावरकर को काला पानी की सजा पर कोर्ट परे की सेलुलर जेल में भेज दिया गया।  वीर सावरकर 4 जुलाई 1911 से 21 मई 1921 तक कोर्ट पर जेल में रहे और कला पानी जैसी घोर यातना वाली सजा प्राप्त की।

इन सब के बाद अंग्रेजो ने वीर सावरकर की याचना पर दोबारा विचार कर के उनकी सजा को माफ़ कर के उनको रिहा कर दिया।

रिहा होने के बाद सावरकर ने बहुत सी क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। जब 1947 में भारत आजाद हुआ उसके बाद गाँधी जी की मौत के बाद उनको भी गिरफ्तार कर लिया गया।

नवंबर 1963 में वीर सावरकर की पत्नी की भी मौत हो गयी और इनकी पत्नी के गुजरने के 2 साल बाद सितम्बर 1965 में उनको बीमारी ने घेर लिया। इसके बाद उन्होंने उपवास करने के फैसला लिया।  सावरकर ने 26 Feb 1966 को सुबह 10 बजे अपने प्राण त्याग दिए।

वीर सावरकर की प्रमुख बाते।

1 ये एक पहले भारतीय थे जिन्होंने एक अछूत को मंदिर का पुजारी बनाया था।
2 सावरकर गाय को एक बहुत ही उपयोगी पशु मानते थे।
3 वीर सावरकर पहले भारतीय थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रो की होली जलाई थी और सवदेशी का नारा दिया था।
4 वे पहले भारतीय थे जिन्होंने पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की थी।
5 सावरकर महात्मा गाँधी के कटु वाचक थे।

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