ईमानदारी का फल कहानी | Best Motivational Story In Hindi - Smart Way

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Thursday, June 18, 2020

ईमानदारी का फल कहानी | Best Motivational Story In Hindi


ईमानदारी का इनाम | Fruit Of Honesty Story In Hindi | Hindi Motivational Story 





दोस्तों बहुत समय पहले एक गांव में रमन नाम का एक व्यक्ति रहता था। वो बहुत गरीब था लेकिन जितना वो गरीब था उतना ही ईमानदार भी था।


उसका पेशा था की वो रंग करने के कार्य करता था जिससे वो ज्यादा धन नहीं कमा पाता था। इससे वो बस इतना ही कमा पता था जिससे उसके घर की रोज की जरूरते पूरी हो सके।

लेकिन उसका एक सपना था की वो अपने लिए एक बहुत अच्छा घर बना पाए जिससे वो अपने इस सपने को पूरा कर सके इसलिए वो यही सोचता था की एक बार मुझे कोई बड़ा काम मिल जाये जिससे में अच्छी कमाई कर सकू।





फिर एक दिन उसको एक साहूकार का बुलावा आया तो रमन उस साहूकार से मिलने गया। साहूकार ने रमन से कहा की मेरी एक नाव है जिस्सको तुम्हे रंग करना होगा। तो रमन इसके लिए तैयार हो गया फिर साहूकार ने रमन से पूछा की तुम इस काम के कितने रूपये लोगे तो रमन ने कहा के इस काम के 3000 रूपये बनते है और जैसा आप सही समझे।

फिर साहूकार ने रमन ये कहा ठीक है में तुमको इस काम के 3000 रूपये दे दूंगा लेकिन काम एक दम अच्छी तरीके से होना चाहिए तो रमन ने कहा की में इस काम को बिलकुल अच्छी तरीके से करूँगा।


उसके बाद रमन अपने घर आया और नाव को रंगने का सामान लेकर नाव को रंगने चला गया। 

रमन जैसे ही नाव को रंगने के काम को शुरू किया तो उसने देखा की उस नाव में तो एक बड़ा सा छेद हो रहा है तो रमन ने सोचा की सबसे पहले इस छेद को बंद कर देता हु उसके बाद नाव को रंग करूँगा।




नाव के छेद को बंद करने के बाद उसने पूरी नाव को बहुत अच्छे से रंग कर दिया और अपना सारा काम ख़त्म कर दिया। सभी काम खत्म हो जाने के बाद साहूकार आया और बोलै की तुम ने बहुत अच्छा काम किया है तुम कल आकर मुझसे अपने पैसे ले जाना। रमन हाँ बोल कर वहां से चला गया।


साहूकार ने अपने परिवार वालो को उस नाव में बैठाकर नदी की सैर करने के लिए भेज दिया। 

उसके बाद साहूकार के पास उस नाव का चालक आया जो की कुछ दिनों के लिए छूटी लेकर अपने घर गया था। तो उसने आते ही साहूकार से पूछा की मालिक वो नाव कहा है तो साहूकार ने कहा की उस नाव में तो मेरे परिवार वाले सेर करने गए है।

तो नाव चालक ये सुन कर परेशान हो गया तो साहूकार ने चालक से पूछा की तुम इतने परेशान क्यों हो रहे हो तो नाव चालक ने बताया की मालिक उस नाव में तो एक बड़ा छेद है तो नाव को आसानी से डूबा सकता है। ये बात सुन कर साहूकार बहुत ज्यादा परेशान हो गया।

तब साहूकार के परिवार के सारे सदस्य सही सलामत अपने घर वापस आगये जिनको देख कर साहूकार बहुत खुश हुआ।




फिर क्या था उसने रमन को बुलवाया और उसके पैसे दिए तो रमन ने जैसे ही पैसे गिने तो उसने देखा की ये तो 10000 रूपये है तो उसने साहूकार से कहा की साहब आपने शायद गलती से मुझे ज्यादा पैसे दे दिए है। तभी साहूकार ने कहा की ये तुम्हारे काम के ही पैसे है तो कहा  हमारे बीच तो 3000 रूपये की बात हुयी थी तो ये 7000 अधिक क्यों।

तो साहूकार ने कहा ये उस काम के पैसे है जो काम तुम्हारा नहीं था फिर भी तुमने उसको पूरा किया तो रमन ने पूछा की वो कोनसा काम था तो साहूकार ने बताया की वो नाव का छेद जिसके कारण आज मेरा परिवार बच पाया है।




में तुम्हारे काम से बहुत अधिक खुश हु इसलिए मेने तुमको ये अधिक राशि दी है और तुम इसके हक़दार भी हो। उसके बाद रमन खुश हुआ और अपने घर की ओर चला गया और साहूकार भी बहुत खुश था कोई उसका परिवार बच गया।

शिक्षा - दोस्तों इस कहानी में हमें ये शिक्षा मिलती है की हमें कभी ये नहीं सोचना चाहिए की इस काम के लिए तो हमें पैसे ही नहीं मिले रहे तो ये काम में क्यों करू। हमें जो भी काम मिले उसको ईमानदारी के साथ पूरा करना चाहिए। क्योकि हमें हमारी ईमानदारी का इनाम जरूर मिलता है।


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