Attitude VS Ego In Hindi | मनोवृत्ति और अहंकार में क्या अंतर है - Smart Way

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Monday, March 2, 2020

Attitude VS Ego In Hindi | मनोवृत्ति और अहंकार में क्या अंतर है



नमस्कार दोस्तों आज हम आपको ये बताएँगे की दृष्टिकोण क्या होता है(What Is Attitude In Hindi), अहंकार क्या होता है(What Is Ego In Hindi) और दृष्टिकोण और अहंकार में क्या अंतर(Difference Between Attitude And Ego In Hindi) है। ये जानना हमारे लिए बहुत जरुरी है।



क्योकि बहुत से लोग Attitude और Ego इन दोनों को एक समान ही मानते है। उन्हें ये ही पता नहीं होता की इन दोनों में क्या अंतर है। ऐसा इसलिए होता है क्योकि Attitude और Ego इन दोनों के बिच का अंतर बहुत ही कम है। लेकिन आज हम आपको एक दम सही तरीके से बताएँगे की ये दोनों क्या है और इन दोनों में क्या अंतर है।

इसमें हम सबसे पहले जानेंगे की दृष्टिकोण(Attitude) क्या होता है फिर बात करेंगे की अहंकार(Ego) क्या होता है और सबसे आखरी में बात करेंगे की Attitude और Ego में क्या अंतर है।

दृष्टिकोण क्या है | What Is The Attitude In Hindi | Attitude Meaning in Hindi


दोस्तों देखा जाये तो ऐटिटूड वो खिड़की है(Attitude Meaning In Hindi) जिसके माध्यम से हम पूरी दुनिया और उसके लोगो को देखते है। अब यहाँ आपके पास दुनिया को देखने के लिए 2 तरीके है जिसमे से एक है नकारात्मक तरीका(Negative Way) और दूसरा है सकारात्मक तरीका। (Positive Way)

आपका दृस्टिकोण ही आपका ऐटिटूड है। मतलब(Attitude meaning in Hindi) जो आपके देखने का नजरिया है वो आपका ऐटिटूड होता है। इसको हम एक उदहारण से भी समझ सकते है।



मान लीजिये की आपके सामने एक पानी का गिलास जो की आधा भरा हुआ है। अब में आपसे ये पूछता हु की ये गिलास आधा भरा हुआ है या आधा खाली है। तो इसके लिए आपका क्या जवाब होगा और इसका जो जवाब आप निकालेंगे वही आपके दृस्टिकोण को दर्शाता है।

यदि आप बोलते हो की पानी का गिलास आधा भरा हुआ है तो आपका दृस्टिकोण सकारात्मक(Positive Attitude) होगा और यदि आप बोलते है की गिलास आधा खाली है तो आपका दृस्टिकोण नकारात्मक(Negative Attitude) होगा। इसका मतलब आप चीजों को नकारात्मक रूप में देखते हो। यहाँ कुछ उदाहरण है जो आपको ये समझने में सहायता करेगी।

  • में ये कर सकता हु ये मेरा सकारत्मक दृस्टिकोण है।
  • में ये नहीं कर सकता ये मेरा नकारात्मक दृस्टिकोण है
  • नकारात्मक लोग हमेशा समस्याओ को देखते है।
  • सकारात्मक लोग हमेशा समस्याओ के हल को देखते है
  • सकारात्मक लोग हमेशा काम को करने के लिए बहाने ढूंढ़ते है
  • नकारात्मक लोग अपने काम से छुपते रहते है।
  • सकारात्मक लोग हमेशा जो उसके पास है उसके लिए भगवान को धन्यवाद देते है।
  • नकारात्मक लोग जो उनके पास नहीं है उसके लिए भगवान को दोष देते है।

बात यहाँ बिलकुल साफ है की जो आपके देखने का नजरिया है वो ही आपका ऐटिटूड होता है। बस आपके देखने के तरीके 2 प्रकार के होते है सकारात्मक और नकारात्मक। अब बात करते है की Ego क्या होता है।

अहंकार क्या है | What Is Ego In Hindi | Ego Meaning In Hindi


बहुत-सी बार हमारी असफलताओ का कारण भी ये बन जाता है। जिसको हम Ego कहते है। इसका मतलब होता है(Ego Meaning In Hindi) अहंकार जोकि आजकल हर किसी में होना बहुत ही आम बात है। लेकिन ये हमारे लिए एक स्तर पर जाकर समस्या का कारण बन सकता है। लेकिन पहले जान लेते है की ईगो क्या होता है।


दोस्तों इसकी परिभाषा बहुत सरल लेकिन इसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। जब आपकी भाषा के अंदर "हम" की जगह पर "में" का प्रयोग होने लग जाये तो आप समझ लेना की आपके अंदर ईगो प्रवेश कर चूका है।

जब आप "हम" का उपयोग छोड़ कर "में" का उपयोग करने लग जाते हो तो आप एक अहंकारी व्यक्ति बन जाते हो। आपने बहुत से लोगो को देखा होगा की वो अपने जीवन में बहुत सफल होते है लेकिन वो एक दम से भिखारी बन जाते है और वो उसके अहंकार के कारण होता है।

ईगो के अंदर हम दुसरो के बारे में सोचने से पहले अपने आप के बारे में सोचते है। वो हर बात में अपने आपको आगे दिखाने की कोशिश करते है और कभी-कभी तो जब बात उनके आत्मसमान की आ जाती है तो वो दुसरो को निचा दिखाने की कोशिश करते है।

ईगो में आकर हम हमारे सामने दुसरो को कुछ नहीं समझते और उसका अपमान करने लगते है और उसको अपना शत्रु बना लेते है। तो चलिए अब जानते है की ईगो और ऐटिटूड में क्या अंतर है।

अहंकार और मनोवृत्ति में क्या अंतर है |Difference between Ego and Attitude in Hindi


जिसके अंदर ऐटिटूड होता है वो बोलता है की में इसको कर सकता हु जबकि एक ईगो वाला व्यक्ति बोलता है इसको बस में ही कर सकता हु। मतलब मेरे अलावा इस काम को कोई भी नहीं कर सकता।

एक ऐटिटूड वाला व्यक्ति कभी अपनी गुणवत्ता का दिखावा नहीं करता जबकि एक अहंकारी व्यक्ति हमेशा अपने कामो को और गुणों को दुसरो को दिखता है।



ऐटिटूड हमें काम को करने के लिए एक बेहतर समझ देता है जिससे हम उस काम को कर सके। जबकि ईगो हमे Overconfidence देता है। जो हमारी सफलता के अंत का कारण बनता है।

ऐटिटूड हमे दुसरो के साथ जोड़ता है लेकिन ईगो हमें दुसरो से अगल करने की कोशिश करता है।

हमारे ऐटिटूड का ही एक छोटा सा हिस्सा हमारा ईगो होता है। ये जरुरी नहीं है की जिन लोगो में ऐटिटूड हो उन सबके अंदर ईगो हो। लेकिन जिन लोगो में ईगो होता है उसके अंदर ऐटिटूड भी होता है। ठीक वैसे ही जैसे सारे इंडियन एशियन हो सकते है लेकिन सारे एशियन इंडियन नहीं हो सकते।

ऐटिटूड और ईगो में उतना ही अंतर होता है जितना की एक लीडर में और बॉस में होता है।

"There Is As Much Difference Between Attitude And Ego As Between A Leader And A Boss"

तो देखा आपने की ऐटिटूड और ईगो में कितना कम अंतर है। इसलिए ये जरुरी है की आपके अंदर ऐटिटूड हो लेकिन ईगो बिलकुल नहीं हो।

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