कृष्णा अर्जुन गीता उपदेश - Geeta Gyan Hindi Me - Smart Way

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Sunday, February 16, 2020

कृष्णा अर्जुन गीता उपदेश - Geeta Gyan Hindi Me




हेलो दोस्तों हम आपको यहाँ कुछ हिंदी मोटिवेशनल लाइन(Hindi Motivational Line) शेयर करेंगे जोकि श्री कृष्ण ने हमें श्री मद भागवत गीता(Geeta Updesh In Hindi) के माध्यम से बताया है। यदि जीवन में आपको आगे जाना है तो आपको इन की बहुत जरूरत है।



श्री कृष्ण ने जो उपदेश आज से 5000 साल पहले दिए थे वो आज भी उतने ही सत्य है जितना की 5000 साल पहले थे। यदि हमें अपने जीवन में सफलता चाहिए तो हमें इन बातो का जरूर ध्यान रखना चाहिए। तो आईये जानते है क्या है वो गीता के उपदेश जो हमें श्री कृष्ण बताना चाहते है।(Geeta Gyan In Hindi)


श्री मद भगवत गीता उपदेश - भगवान श्री कृष्ण के माध्यम से | Bhagwat Geeta Updesh In Hindi


1: अपने रहस्यों को किसी को न बताये।




एक मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या क्या होती है सोचिये धन, प्रेम, अहंकार। मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या होती है उसके रहस्य। चाहे आप कितने भी ताकतवर क्यों न हो कितने भी प्रबल क्यों न हो लेकिन उसके रहस्य उसके नाश की चाबी होती है। इसलिए यदि आपको प्रबल रहना है शक्तिशाली रहना है तो आपने रहस्य को किसी को भी न बताये न मित्र को न शत्रु को क्योकि समय पड़ने पर कौन शत्रु हो जाये ऐसा बोलना सम्भव नहीं।



क्या आप जानते है रावण को भी राम सिर्फ इसलिए मार पाए थे क्योकि विभीषण को ही रावण के अमृत कुंड का पता था और विभीषण रावण का भाई था जोकि उसका शत्रु बन गया था और उसने रावण को मारने का रहस्य राम को बता दिया था। इस कारण रावण को श्री राम मार पाए थे।

इसलिए आपको अपने रहस्यों को हमेशा छुपाकर रखना चाहिए।


Krishna Arjun Geeta Updesh In Hindi


2: कभी किसी की नक़ल नहीं करे


मनुष्य जीवन की परीक्षा में सफल होने के लिए क्या नहीं करता। वो परिश्रम करता है दौड़ भाग करता है और जब ये सब करने के बाद भी उसको सफलता नहीं मिलती तो वो नक़ल करता है। एक बार जाईये अपने बचपन में और याद कीजिए अपने बचपन की के उन पलो को क्या आपको याद आया की विद्यालय में जब आप परीक्षा देने जाते थे तो क्या होता है आप ना सही लेकिन कोई न कोई एग्जाम में पास होने के लिए नक़ल करता ही था और पास भी हो जाता था।

लेकिन जीवन की परीक्षा ऐसी नहीं होती। नक़ल करने वाला कभी सफल नहीं होता इसका कारण ये है परीक्षा में सबके प्रश्न पत्र एक होते है लेकिन जीवन के प्रश्न पत्र और उनकी कठिनाई सबके लिए अलग अलग होती है। तो निश्चित रूप से उनके उत्तर भी अलग अलग ही होंगे ना इसलिए यदि आपको जीवन में सफलता चाहिए तो नक़ल नहीं करे और अपने प्रश्नो को उत्तर भी स्वयं ही खोजे और सफलता आपकी ही होगी।




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3: सफलता और असफलता क्या है इसको जाने


एक मनुष्य का जीवन हार और जीत, सफलता और असफलता के बीच में ही झूलता रहता है। आपके साथ भी ऐसा होता होगा जब आप सफल होते है या किसी चुनौती पर विजय पाते है तो मन प्रसनता से भर जाता है और जब आप असफल हो जाते है तो मन दुःख पीड़ा के सागर में डूबने लगता है।

लेकिन क्या आप जानते है की वास्तव में सफलता और असफलता क्या है। लेकिन में आपको बता दू की ये हमारी मनस्तिथि मात्र है। हम कभी उस समय नहीं हारते जब हमारा शत्रु विजय प्राप्त कर लेता है। हमारी पराजय तो तब होती है जब हम पराजय को स्वीकार कर लेता है।

हम असफल तब नहीं होते जब हम लक्ष्य को नहीं पा सके जबकि हम असफल तब होते है जब हम प्रयास करना बंद कर देते है। इसलिए हमेशा कोशिश करते रहिये। क्योकि जिस दिन आप हार को स्वीकारना बंद कर देंगे जीत आपके कदमो में होगी।


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4: बिना किसी लोभ के दुसरो की मदद करे


आपने कभी न कभी तो बरगद के पेड़ को देखा ही होगा क्या आपको पता है की बरगद के बीज का आकार राई से भी छोटा होता है। लेकिन बरगद के वृक्ष विश्व के सबसे बड़े पेड़ो में जाना जाता है। जब वो छोटा होता है तो उसमे वो जटाये और शाखाये नहीं होती लेकिन जैसे जैसे उसका आकार बड़ा होता है वैसे वैसे उसकी शाखाये जटाये बन कर उसकी जड़ तक पहुँचती है और उस वृक्ष को सहारा देती है।



वैसे ही आपको भी बिना लोभ लालच के दुसरो की सहायता करनी चाहिए। जिससे जिन लोगो की आपने सहायता की वो आपके सहायक बनते जायेंगे। आपकी जड़ो को और बलशाली बनायेगे। आपका मान बढ़ाएंगे और आपका सम्मान भी। और पूरी जिंदगी आपकी सहायता के लिए ततपर रहेंगे। आपका निष्काम कर्म ही आपको आजीवन अमर बनायेगे।


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5: आवश्यता से अधिक नहीं बोले


क्या आप ये जानते है की मानव शरीर दुनिया के सबसे बड़े आविष्कारों में से एक है। हमारे शरीर जितनी जटिल बनावट किसी भी चीज की नहीं है। हमारा शरीर जितना जटिल है इससे सरल ज्ञान देने वाला कोई नहीं है। हमारे शरीर में ५ इन्द्रिया होती है जो हमें भाव, गुण और वस्तुओ का ज्ञान करवाती है। हमारे पास आँख है नाक है, स्पर्श करने के लिए त्वचा है और जीवा है और इन सब का अलग अलग कार्य है।

आँखों का काम देखना, कानो का सुनना, नाक से साँस लेना और जीवा से बोलना। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है की प्रकर्ति ने हमें दो आँखे दी, दो कान दिए, दो हाथ दिए लेकिन जीवा सिर्फ एक दी। अब ऐसा क्यों क्योकि प्रकर्ति ऐसा चाहती है की हम देखे अधिक, सुने अधिक और ज्ञान अधिक अर्जित करे लेकिन बोले कम। क्योकि ज्यादा बोलना नाश को निमत्रण देता है। इसलिए आपको भी आपने मुख पर नियंत्रण रखना चाहिए। और ज्यादा बोलने से बचना चाहिए।


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